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*पूर्णिया सदर अस्पताल में फर्जी मूर्छक का पर्दाफाश, शिकायत पर जांच रिपोर्ट ने खोली पोल।*

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पूर्णिया (बिहार)। सदर अस्पताल पूर्णिया में स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां कार्यरत डॉ. सुधांशु कुमार फर्जी मूर्छक (Anaesthetist) निकले। समाजसेवी एवं विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ सदस्य रंजन कुणाल की शिकायत पर गठित सात सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि सुधांशु कुमार के पास निश्चेतना (Anaesthesia) की कोई मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है।

जांच में बड़ा खुलासा:-जांच रिपोर्ट के मुताबिक सुधांशु कुमार पहले निश्चेतना विभाग में केवल सहायक के रूप में कार्य कर चुके हैं। किसी आपातकालीन स्थिति में सहयोग देने के लिए उन्हें अस्पताल प्रशासन से मात्र अनुमति-पत्र मिला था। लेकिन जब उनसे मूर्छक विशेषज्ञ होने का प्रमाणपत्र मांगा गया तो वे कोई डिग्री या दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सके।

रंजन कुणाल की शिकायत से मामला खुला: इस मामले की शुरुआत तीन नवंबर 2024 को हुई। गंगा स्नान से लौटते समय हुए सड़क हादसे में रंजन कुणाल और उनकी पत्नी घायल हो गए थे। इलाज के लिए उन्हें सदर अस्पताल लाया गया, जहां कई डॉक्टरों के सहयोगी रवैये की उन्होंने सराहना की, लेकिन डॉ. सुधांशु कुमार पर मरीजों और परिजनों के प्रति अभद्र और असंवेदनशील व्यवहार का आरोप लगाया। इसके बाद कुणाल ने अस्पताल अधीक्षक को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई।

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दबाव और सुरक्षा की चिंता: शिकायत दर्ज होने के बाद रंजन कुणाल ने आरोप लगाया कि उन पर शिकायत वापस लेने के लिए लगातार दबाव और प्रताड़ना बनाई गई। उन्होंने बताया कि डर की वजह से उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर डीआईजी को भी पत्र लिखा। इसके बावजूद विश्व हिंदू परिषद के सहयोग से वे डटे रहे और अंततः जांच में सच्चाई सामने आ गई।

वीएचपी की प्रतिक्रिया: जांच रिपोर्ट आने के बाद विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र भगतराणा गौतम, पंकज मिश्रा, मृत्यंजय महान सहित अन्य पदाधिकारियों ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह हमारी पहली जीत है और आगे भी जिले में जहां-जहां फर्जी डॉक्टर या अवैध नर्सिंग होम का खेल होगा, वहां संगठन कानूनी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेगा।

कार्रवाई की प्रतीक्षा:अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं। फर्जी मूर्छक का मामला उजागर होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ गए हैं और आम जनता कार्रवाई का इंतजार कर रही है।

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