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ध्वजारोहण की तस्वीर पर सोशल मीडिया में बहस, तिरंगे के सम्मान को लेकर उठे सवाल.?

विधायक कृष्ण कुमार ऋषि की वायरल तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की टिप्पणियां सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स ने तिरंगे के सम्मान को लेकर सवाल उठाए, तो कुछ ने तस्वीर के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे तथ्य सामने आने की बात कही।क्या कहता है ध्वज संहिता? जानिए पूरा मामला।...see more

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ध्वजारोहण की तस्वीर पर सोशल मीडिया में बहस, तिरंगे के सम्मान को लेकर उठे सवाल.?

सम्पूर्ण भारत (पूर्णिया)। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बनमनखी विधायक कृष्ण कुमार ऋषि के ध्वजारोहण कार्यक्रम की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। तस्वीर को लेकर बनमनखी के विभिन्न सोशल मीडिया हैंडलर और यूजर्स अलग-अलग तरह के कमेंट कर रहे हैं।

वायरल तस्वीर में विधायक ध्वज को सलामी देते नजर आ रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि उनके पैरों के नीचे तिरंगे के रंगों से बनाई गई सजावट दिखाई दे रही है। इसे लेकर कुछ लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और भारतीय ध्वज संहिता के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, कुछ यूजर्स ने मामले को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे तथ्य सामने आने की बात कही है।

सोशल मीडिया पर चल रही बहस में कुछ लोग विधायक और कार्यक्रम आयोजकों से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य लोगों का कहना है कि केवल वायरल तस्वीर के आधार पर किसी व्यक्ति की मंशा या गलती को तय करना उचित नहीं होगा।वहीं, तस्वीर में दिखाई दे रही जमीन की सजावट वास्तव में राष्ट्रीय ध्वज का स्वरूप थी या केवल तिरंगे के रंगों से की गई सजावट, यह तस्वीर के आधार पर स्पष्ट रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्ष का बयान और कार्यक्रम की पूरी जानकारी सामने आना जरूरी है।

इस संबंध में विधायक कृष्ण कुमार ऋषि का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।फिलहाल मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और बनमनखी के अलग-अलग सोशल मीडिया हैंडल से इस तस्वीर को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े किसी भी मामले में तथ्यों की पुष्टि के बाद ही निष्कर्ष निकालना उचित होगा।

क्या कहती है भारतीय झंडा संहिता?

गृह मंत्रालय के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय ध्वज देश के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है और उसे सम्मानजनक स्थान दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन और उपयोग को भारतीय झंडा संहिता, 2002 तथा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 नियंत्रित करते हैं।गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि राष्ट्रीय ध्वज को जमीन या फर्श को छूने नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय ध्वज को सजावट के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। क्षतिग्रस्त अथवा अस्त-व्यस्त ध्वज का प्रदर्शन भी नहीं किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज का निर्धारित स्वरूप भी स्पष्ट है। झंडा आयताकार होना चाहिए और उसकी लंबाई तथा चौड़ाई का अनुपात 3:2 निर्धारित है।

 

क्या तिरंगे के रंगों वाली जमीन की सजावट को राष्ट्रीय ध्वज माना जाएगा.?

यही इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण पहलू है। केवल केसरिया, सफेद और हरे रंग की सजावट को देखकर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि वह राष्ट्रीय ध्वज ही था। इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि उस आकृति का स्वरूप क्या था और क्या उसमें राष्ट्रीय ध्वज की अन्य निर्धारित विशेषताएं मौजूद थीं।हालांकि, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 राष्ट्रीय ध्वज को अपमानित करने, रौंदने या उसके प्रति अन्य प्रकार से अनादर दिखाने को दंडनीय बनाती है। कानून में राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर, चित्र, ड्राइंग या अन्य दृश्य प्रतिनिधित्व को भी राष्ट्रीय ध्वज की परिभाषा में शामिल किया गया है। उल्लंघन की स्थिति में तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

 

सोशल मीडिया पर तरह-तरह की टिप्पणियां.?

तस्वीर सामने आने के बाद बनमनखी के विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स और यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ लोग कार्यक्रम में तिरंगे के सम्मान को लेकर सवाल उठा रहे हैं और मामले की जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे लेकर संयम बरतने तथा तस्वीर की पूरी पृष्ठभूमि सामने आने तक किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराने की बात कह रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही बहस और कानूनी स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी वायरल तस्वीर पर टिप्पणी करना अलग विषय है, जबकि किसी कृत्य को कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज का अपमान मानना तथ्यों और परिस्थितियों की जांच का विषय हो सकता है।

 

तस्वीर से निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी.?

मौजूदा तस्वीर के आधार पर यह स्पष्ट रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है कि विधायक के पैरों के नीचे बनी आकृति राष्ट्रीय ध्वज थी या तिरंगे के रंगों से बनाई गई सजावटी आकृति। इसलिए फिलहाल इसे “तिरंगे के सम्मान को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवाल” के तौर पर देखना अधिक उचित होगा।मामले में विधायक कृष्ण कुमार ऋषि या कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण सामने आने के बाद स्थिति और साफ हो सकती है। समाचार लिखे जाने तक विधायक का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 

कुल मिलाकर, भारतीय झंडा संहिता राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान बनाए रखने पर जोर देती है। लेकिन वायरल तस्वीर में दिखाई दे रही सजावट को सीधे राष्ट्रीय ध्वज मानकर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले पूरे तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है।

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