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संपादकीय
*सन्यास, प्रेम और समाज का न्याय—क्या बदलना अपराध है?.*
समाज की एक पुरानी प्रवृत्ति है—वह व्यक्ति को बदलते हुए स्वीकार करने में सबसे अधिक असहज महसूस करता है। खासकर तब, जब वह बदलाव उसकी बनाई हुई धारणाओं…
*“सिस्टम की सीढ़ी या सोने की खदान?”: जब अफसर, परिवार और ‘नौकरानी’ सब बन गए करोड़पति.*
सम्पूर्ण भारत डेस्क:-बिहार में एक बार फिर प्रशासनिक ईमानदारी की परतें उधड़ती नजर आ रही हैं। मामला एक ऐसे पुलिस अधिकारी से जुड़ा है, जिनके इर्द-गिर्द…
जेफ़्री एपस्टीन: जन्म से पतन तक-शक्ति, संपत्ति और विवाद की पूरी कहानी.?
दुनिया के बदलते मीडिया परिदृश्य में कुछ घटनाएँ केवल समाचार नहीं रहतीं, बल्कि वैश्विक विमर्श का विषय बन जाती हैं। आज “Epstein Files” की चर्चा विश्व…
गिरफ्तारी या संदेश? पप्पू यादव केस से बिहार की राजनीति में भूचाल
बिहार की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। पप्पू यादव की हालिया गिरफ्तारी ने राज्य में कानून, राजनीति और लोकतंत्र के रिश्ते को लेकर नई बहस छेड़ दी…
डिजिटल मीडिया का प्रभाव: सूचना की गति, जिम्मेदारी और लोकतंत्र.
डिजिटल मीडिया ने सूचना के स्वरूप और प्रसार की दिशा को पूरी तरह से बदल दिया है। जहां कभी-कभी खबरों के लिए अखबार या टीवी बैले का इंतजार किया जाता था,…
ग्रामीण भारत की आवाज़: लोकतंत्र की असली पहचान
भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है—यह कथन वर्षों से दोहराया जाता रहा है, लेकिन इसकी वास्तविकता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। देश की बड़ी आबादी…
“विश्व हिंदी दिवस: भाषा का उत्सव, पहचान का आत्मसम्मान”
आज 10 जनवरी—विश्व हिन्दी दिवस।यह मात्र एक कैलेंडर तिथि नहीं, बल्कि उस भाषाई गौरव का स्मरण है, जिसने सदियों से भारतीय जनजीवन की धड़कनों को शब्द…
कफन पर छूट और सिस्टम की चुप्पी-यह दृश्य भारत के विवेक को झकझोरने वाला है…?
(ADVOCATE S.K.SAMRAT)
देश के कई हिस्सों में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन को तो प्रभावित किया ही है, लेकिन इससे अधिक चिंता का विषय वह ख़बर है,…
*अमानत या एग्रीमेंट? यतीमखाना की ज़मीन पर सवालों का रजिस्ट्रेशन!*
पूर्णिया(बिहार):-यतीमखाना की ज़मीन… नाम सुनते ही संवेदना जागती है। लेकिन महाराजगंज–2 एवं जियनगंज पंचायत में यही ज़मीन आज संवेदना नहीं, सौदे की…

