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सच दिखाने का जज्बा

“फाइल, फ्लैट और फॉर्च्यून : बनमनखी कनेक्शन वाला इंजीनियर”

कहते हैं मेहनत का फल मीठा होता है, लेकिन यहां तो सरकारी नौकरी का फल सीधे कैश, जेवर, प्लॉट, फ्लैट और शेयर मार्केट तक पहुंच गया।....see more

Neta ji
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सम्पूर्ण भारत डेस्क:-बनमनखी अब सिर्फ मखाना, खेत, राजनीति और बाढ़ के लिए नहीं जाना जाएगा। अब यहां की पहचान में एक नया अध्याय जुड़ गया है—“18 साल की नौकरी में 10 करोड़ का साम्राज्य” वाला इंजीनियर मॉडल!

 

कहते हैं मेहनत का फल मीठा होता है, लेकिन यहां तो सरकारी नौकरी का फल सीधे कैश, जेवर, प्लॉट, फ्लैट और शेयर मार्केट तक पहुंच गया। गांव के लोग अभी तक यही समझते रहे कि इंजीनियर साहब सड़क और पुल बनाते हैं, पर ईओयू के छापे ने बताया कि असली इंजीनियरिंग तो संपत्ति बढ़ाने की थी।

 

बनमनखी के चौक-चौराहों पर अब लोग दो तरह की तैयारी करते दिख रहे हैं। एक वर्ग अब भी प्रतियोगिता परीक्षा की किताब खरीद रहा है, जबकि दूसरा वर्ग यह समझने में लगा है कि “सरकारी वेतन” और “जीवनशैली” के बीच इतना चौड़ा फोरलेन कैसे बन जाता है।

 

गांव के बुजुर्ग भी हैरान हैं। वे कहते हैं— “हमरा जमाना में इंजीनियर लोग नापी-जोखी करता था, अब तिजोरी की गिनती भी करता है!”

 

उधर सोशल मीडिया ने तो मानो पूरा शोधपत्र तैयार कर दिया। कोई कह रहा है—“देखिए, यही है बिहार मॉडल का रियल एस्टेट संस्करण।” कोई लिख रहा है—“सड़क चाहे टूटी रहे, लेकिन बैंक बैलेंस मजबूत होना चाहिए।”

 

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सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन सड़कों पर जनता रोज गड्ढे गिनती रही, उन्हीं सड़कों ने शायद इंजीनियर साहब के लिए समृद्धि का एक्सप्रेस-वे बना दिया। ग्रामीण कार्य विभाग का नाम सुनकर लोगों को लगता था कि विभाग गांव की तस्वीर बदलता होगा, लेकिन अब पता चल रहा है कि कई बार विभाग पहले अफसरों की तस्वीर बदल देता है।

 

ईओयू की टीम जब नोट गिन रही थी, तब बनमनखी में कई युवाओं के सपने भी अचानक बदल गए। पहले लोग डॉक्टर-आईएएस बनने की सोचते थे, अब मजाक में पूछ रहे हैं— “भाई, इंजीनियरिंग कॉलेज का फॉर्म कहां मिलता है?”

 

हालांकि यह भी सच है कि जांच अभी जारी है और अदालत का फैसला बाकी है। लेकिन बिहार की जनता अदालत से पहले अनुभव पर भरोसा करती है। जनता जानती है कि सरकारी फाइलों में जितना सीमेंट सड़क पर नहीं लगता, उससे कहीं ज्यादा “सिस्टम” में लग जाता है।

 

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बिहार में सड़क चाहे समय पर बने या नहीं, संपत्ति का विकास कार्य बहुत तेज गति से चलता है।

 

और बनमनखी? वह हमेशा की तरह चाय की दुकान पर बैठा यह सोच रहा है कि आखिर 18 साल की नौकरी में इतना “विकास” कैसे हो जाता है, जबकि आम आदमी 18 साल में एक ढंग का मकान भी नहीं बना पाता।

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