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“भरत तिवारी एनकाउंटर: न्याय की मांग से पुलिस पर FIR तक, बिहार में गरमाई सियासत”

*"आत्मसमर्पण या मुठभेड़? एक सप्ताह बाद भी जवाब तलाश रहा बिहार"*

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(S.K. SAMRAT)
(S.K. SAMRAT)

आरा/पटना, 24 जून। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के युवा सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत का मामला अब बिहार की राजनीति, पुलिस व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है। घटना के एक सप्ताह के भीतर मामले ने ऐसा मोड़ लिया है कि अब स्वयं पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और राज्य सरकार न्यायिक जांच कराने को मजबूर हुई है।

 

17 जून को हुई इस घटना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में कार्रवाई की गई। दूसरी ओर परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और फेसबुक लाइव ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

 

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मामले में बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब मृतक की मां के आवेदन पर तत्कालीन SDPO, शाहपुर थानाध्यक्ष तथा अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हत्या सहित विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। इससे पहले बिहार सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश भी जारी किए थे।

 

इस प्रकरण ने राजनीतिक रूप से भी व्यापक असर डाला है। विभिन्न दलों के नेताओं ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। जन सुराज के प्रशांत किशोर ने सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर गोली चलाने का आदेश किस स्तर से दिया गया था। वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों द्वारा भी न्याय की मांग को लेकर आंदोलन जारी है।

 

मामले की गूंज अब न्यायालय तक पहुंच चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय में सीबीआई जांच की मांग को लेकर जनहित याचिका भी दायर की गई है। हालांकि तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की गई, लेकिन प्रकरण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।

 

सबसे बड़ा सवाल:-भरत भूषण तिवारी कौन थे—एक अपराधी, एक मानसिक रूप से अस्थिर युवक, या फिर स्थानीय समस्याओं को उठाने वाला एक सामाजिक कार्यकर्ता? इस प्रश्न का उत्तर अब जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया को देना है। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने बिहार पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और मुठभेड़ की वैधता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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