Sampurn Bharat
सच दिखाने का जज्बा

*अमानत या एग्रीमेंट? यतीमखाना की ज़मीन पर सवालों का रजिस्ट्रेशन!*

*— महाराजगंज–2 एवं जियनगंज में 150 एकड़ पर सियाही सूखी, सवाल गीले हैं.......?

Neta ji
- Advertisement -

- Advertisement -

News Add crime sks msp

पूर्णिया(बिहार):-यतीमखाना की ज़मीन… नाम सुनते ही संवेदना जागती है। लेकिन महाराजगंज–2 एवं जियनगंज पंचायत में यही ज़मीन आज संवेदना नहीं, सौदे की शक्ल ले चुकी है। सवाल यह नहीं कि 150 एकड़ ज़मीन पर अवैध कब्जे का आरोप है; सवाल यह है कि अमानत बिक कैसे गई, और बिक गई तो सरकारी मुहर कैसे लग गई? पंचायत की जनता ने अनुमंडल पदाधिकारी प्रमोद कुमार को आवेदन देकर वही पूछा है, जो हर कानून–पसंद नागरिक पूछेगा—यतीमों के हक़ की ज़मीन पर रजिस्ट्री किस भरोसे हुई?

❓ सवाल नंबर 1: यतीमखाना की ज़मीन आखिर होती क्या है? कानून कहता है—यतीमखाना/वक्फ ट्रस्ट की भूमि बेचने योग्य नहीं, हस्तांतरण योग्य नहीं।तो फिर महाराजगंज–2 में यह ज़मीन खरीद–बिक्री की भाषा कैसे बोलने लगी?

❓ सवाल नंबर 2: अगर गलती से बिकी, तो म्यूटेशन कैसे हुआ?ग्रामीणों का आरोप है कि खाता संख्या 484 (खेसरा 69, 10, 66, 67, 70) की ज़मीन पर—कहीं नामांतरण, कहीं कब्जा और कहीं खामोशी एक साथ दिखती है। नामांतरण की फाइलें क्या खुद चलकर दफ्तर पहुँचीं? या किसी ने रास्ता दिखाया?

❓ सवाल नंबर 3: सरकारी ट्रस्ट की ज़मीन पर ‘निजी सपना’ कैसे उगा? करीब 100 एकड़ भूमि पर कथित कब्जा—यह सिर्फ ज़मीन नहीं, सरकारी निगरानी का इम्तिहान है। जब हर इंच जमीन का हिसाब कंप्यूटर में है, तो अतिक्रमण ऑफलाइन कैसे फल–फूल गया?

❓ सवाल नंबर 4: करोड़ों का सौदा और जिम्मेदारी शून्य?आरोप है कि कथित सौदों में करोड़ों रुपये की गंध है।तो फिर— जांच की गति कछुआ क्यों? कार्रवाई का स्वर फुसफुसाहट क्यों? और जवाबदेही गायब क्यों?

News add 2 riya
Advo
News Add crime sks msp
- Advertisement -

- Advertisement -

जनता की मांगकानून की याद दिलाती सूची
ग्रामीणों ने साफ कहा है: सभी अवैध म्यूटेशन रद्द हों,पूर्व जमाबंदी बहाल हो,पूरा खाता 484 रोक सूची में जाए,अतिक्रमण हटे और ज़मीन सरकारी नियंत्रण में आए,डिजिटल डाटा बने, ताकि अगली पीढ़ी फिर सवाल न पूछे..??

 

प्रशासन क्या कहता है? : एसडीएम प्रमोद कुमार ने अंचलाधिकारी को जांच का निर्देश दिया है।अंचलाधिकारी अजय कुमार रंजन के अनुसार जांच जारी है, रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को दी जाएगी।

 

-:व्यंग की धार:-

  1. काग़ज़ कहते हैं—“यह ज़मीन यतीमों की है।”
  2. ज़मीन कहती है—“यहाँ तो सौदा हुआ है।”
  3. और फाइलें पूछती हैं—“हमें क्यों जगाया?” 

अब देखना यह है कि जांच फाइलों में दबी रहती है, या कब्जों तक पहुँचती है। क्योंकि अगर अमानत ही एग्रीमेंट बन जाए, तो फिर सवाल सिर्फ ज़मीन का नहीं—न्याय का भी हो जाता है.?

डिस्क्लेमर:यह आलेख उपलब्ध आवेदनों, बयानों और प्रारंभिक सूचनाओं पर आधारित है। सभी आरोप जांचाधीन हैं; अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी/न्यायालय पर निर्भर करेगा।

- Advertisement -

- Advertisement -

News Add 3 sks
SBN self add new reporter
Sampurn Bharat Banner
- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

SBN self add new reporter