विभाग के अनुसार, 26 अगस्त 2026 को सुबह करीब 9 बजे तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियल झील फटने से भोटे-कोशी नदी में लगभग तीन मीटर ऊंची जलधारा (सर्ज) प्रवाहित हुई। यह नदी नेपाल में त्रिशूली नदी से मिलती है, जिसके प्रभाव से गंडक नदी के जलस्तर एवं जलप्रवाह में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
बुधवार दोपहर 12 बजे वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 86 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। विभाग के अनुसार जलप्रवाह में आगे और वृद्धि हो सकती है। नेपाल स्थित नारायणी नदी के देवघाट गेज स्टेशन पर जलस्तर 4.77 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि वहां चेतावनी स्तर 7.30 मीटर और खतरे का निशान 9.00 मीटर है। विभाग का अनुमान है कि देवघाट से बढ़ा हुआ जल लगभग साढ़े तीन घंटे में गंडक बराज तक पहुंच सकता है।
संभावित स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए हैं। साथ ही अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी टीम को बराज पर भेजा गया है, जो लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है।
विभाग ने गंडक नदी बेसिन के सभी जिलों को चेतावनी जारी करते हुए तटबंधों की लगातार निगरानी, बाढ़ सुरक्षा सामग्रियों का भंडारण तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारियों के साथ आपात बैठक कर तटबंधों के अंदर रहने वाले लोगों को माइकिंग के माध्यम से सतर्क करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीमों की तैनाती भी की जा रही है।
उधर मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव तथा जल संसाधन विभाग के सचिव के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहते हुए समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने का निर्देश दिया है।