भूख हड़ताल के चौथे दिन भी प्रशासनिक पहल का इंतजार, कुंदन रंजन ने उठाए नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल
धमदाहा नगर पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता, जेम पोर्टल में गड़बड़ी, कथित फर्जी नियुक्ति एवं होल्डिंग टैक्स से जुड़े मामलों की जांच की मांग को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। आंदोलनकारी कुंदन रंजन एवं पार्षद अनुपम देवी प्रशासन से निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पार्षद की तबीयत बिगड़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक ठोस पहल नहीं हुई है।...See more

सम्पूर्ण भारत,धमदाहा (पूर्णिया)। धमदाहा नगर पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता, जेम (GeM) पोर्टल से जुड़ी गड़बड़ियों, कथित फर्जी नियुक्ति एवं होल्डिंग टैक्स से संबंधित मामलों की जांच की मांग को लेकर वार्ड संख्या 17 स्थित काली मंदिर परिसर में चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल सोमवार को चौथे दिन भी जारी रही। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार चार दिनों से आंदोलन चलने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल या औपचारिक वार्ता नहीं की गई है, जिससे आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
गांधी जयंती के दिन शुरू हुआ आंदोलन:
भूख हड़ताल की शुरुआत 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर वार्ड संख्या 17 निवासी इंजीनियर कुंदन रंजन उर्फ चुन्ना ठाकुर एवं वार्ड संख्या 17 की पार्षद अनुपम देवी ने की थी। आंदोलनकारियों के अनुसार, नगर पंचायत की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर पिछले करीब दो वर्षों से संबंधित अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायतें दी जाती रही हैं। उनका दावा है कि शिकायतों के साथ आवश्यक दस्तावेज एवं साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए, लेकिन अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि नगर पंचायत से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक कराना है।
चौथे दिन भी नहीं पहुंचा प्रशासनिक अधिकारी:
आंदोलनकारियों के अनुसार, भूख हड़ताल के तीसरे दिन पार्षद अनुपम देवी की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बावजूद आंदोलन स्थल पर प्रशासन की ओर से किसी अधिकारी के पहुंचने की जानकारी आंदोलनकारियों ने नहीं दी है। चौथे दिन भी आंदोलन जारी रहने के कारण अब प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठने लगे हैं।मंच से संबोधित करते हुए इंजीनियर कुंदन रंजन ने कहा कि एक निर्वाचित महिला पार्षद का लगातार भूख हड़ताल पर बैठना और इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ना गंभीर विषय है। ऐसी स्थिति में प्रशासन को आंदोलन स्थल पर पहुंचकर स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए और शिकायतों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल:
कुंदन रंजन ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता, जेम पोर्टल से संबंधित प्रक्रिया, नियुक्ति एवं होल्डिंग टैक्स से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से सवाल उठाए जा रहे हैं।उनका कहना है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच के बाद स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। वहीं, यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि शिकायतों को लंबित रखने के बजाय प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर वास्तविकता सामने लानी चाहिए, ताकि नगर पंचायत के प्रति आम लोगों का विश्वास बना रहे।
उच्चस्तरीय जांच की मांग:

आंदोलनकारियों ने नगर पंचायत से जुड़े मामलों की स्थानीय स्तर के बजाय उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिन मामलों में शिकायतें की गई हैं, उनकी जांच किसी स्वतंत्र एवं सक्षम अधिकारी या उच्चस्तरीय टीम से कराई जाए। कुंदन रंजन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित मिलीभगत की आशंका भी जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि, यह आरोप आंदोलनकारियों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग:
आंदोलनकारियों ने केवल जांच कराने की मांग ही नहीं की है, बल्कि जांच के बाद रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग रखी है। उनका कहना है कि यदि नगर पंचायत में कोई अनियमितता नहीं हुई है तो जांच रिपोर्ट के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।आंदोलनकारियों के अनुसार, इससे नगर पंचायत की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और आम लोगों के बीच उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल सकेगा।
आंदोलन को समर्थन मिलने का दावा:
भूख हड़ताल को विभिन्न लोगों एवं संगठनों का समर्थन मिलने का दावा आंदोलनकारियों की ओर से किया जा रहा है। आंदोलन के तीसरे दिन आरएसएस के धमदाहा प्रखंड कार्यवाह हितेश गांधी एवं मीरगंज मंडल कार्यवाह विकास यादव आंदोलन स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से मुलाकात कर समर्थन जताया। इससे पहले पूर्व मुखिया शरत चंद्र झा एवं पूर्व मुखिया डॉ. बी.के. ठाकुर भी आंदोलन के समर्थन में सामने आए थे। समर्थकों ने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीर बताते हुए संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई।
प्रशासनिक पहल का इंतजार:
भूख हड़ताल के चार दिन पूरे होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाता है। आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी शिकायतों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।फिलहाल चौथे दिन तक प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच किसी औपचारिक वार्ता अथवा समाधान की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप और प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। नगर पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता, जेम पोर्टल, नियुक्ति और होल्डिंग टैक्स से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय नहीं हुई है। इस संबंध में नगर पंचायत प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें:
- नगर पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
- जेम पोर्टल से जुड़े मामलों की जांच।
- कथित फर्जी नियुक्ति/बहाली की जांच।
- होल्डिंग टैक्स से जुड़े मामलों की जांच।
- उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच की व्यवस्था।
- जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना।
- जांच में दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई।
- आंदोलनकारियों के साथ प्रशासन की औपचारिक वार्ता।








