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*सहुरिया पंचायत में योजना की राशि ग़ायब, सेवानिवृत्त सचिव पर गहराया शिकंजा.*

Neta ji
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बनमनखी (पूर्णिया):-पूर्णिया जिले के बनमनखी अनुमंडल अंतर्गत सहुरिया पंचायत में सरकारी योजना की राशि ग़बन का सनसनीखेज़ मामला सामने आया है। इस मामले में शिकायतकर्ता विपिन कुमार, पिता–विशेश्वर प्रसाद यादव, वार्ड संख्या-11, सहुरिया निवासी ने 15वीं वित्त आयोग से संबंधित योजना में वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जिला पंचायती राज पदाधिकारी, पूर्णिया ने 2 जुलाई को एक जांच दल गठित किया। इसके बाद 24 जुलाई को संयुक्त जांच प्रतिवेदन जमा किया गया। इस रिपोर्ट में साफ़ कहा गया कि तत्कालीन पंचायत सचिव ने योजना क्रियान्वयन में विभागीय निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन नहीं किया। यानी अनियमितता व गड़बड़ी की पुष्टि हुई।

जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने दोषी सेवानिवृत्त पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जैसे ही जवाब प्राप्त होगा, उसके बाद नियमसम्मत कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि दोषी पाए जाने पर सचिव के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई से परहेज़ नहीं किया जाएगा।

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  1. *-26 मई 2025 – शिकायत दर्ज होने पर पहली सुनवाई हुई और जिला पंचायती राज पदाधिकारी को नोटिस भेजा गया।*
  2. *-26 जून 2025 – गड़बड़ी पर विरोधाभासी रिपोर्ट सामने आई। प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी की रिपोर्ट में अनियमितता और ग़बन का संकेत मिला, जबकि तकनीकी सहायक की रिपोर्ट में सबकुछ सही बताया गया।*
  3. *-10 जुलाई व 23 जुलाई 2025 – अंतरिम आदेश जारी कर स्पष्ट रिपोर्ट की मांग की गई।*
  4. *-30 जुलाई 2025 – अंतिम सुनवाई में गड़बड़ी की पुष्टि हुई और सेवानिवृत्त सचिव पर शिकंजा कसने की दिशा तय हुई।*

 

*सवालों के घेरे में पंचायत व्यवस्था:-* यह मामला पंचायत स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। योजना के नाम पर पैसा कहाँ और कैसे गायब हुआ, यह तो जांच के बाद पूरी तरह सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि पंचायत सचिव ने नियमानुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

 

ग्रामीणों का कहना है कि अगर पंचायत स्तर पर ही योजनाओं का पैसा हड़प लिया जाएगा तो विकास कार्य कैसे होंगे? वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुँचाती हैं। अब पंचायत की जनता की नज़र इस पर टिकी है कि जिला प्रशासन दोषी सचिव पर कितनी सख़्ती से कार्रवाई करता है और पीड़ित जनता को न्याय दिलाता है।

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