Sampurn Bharat
सच दिखाने का जज्बा

*“गोरेलाल मेहता कॉलेज की गरिमा पर सवाल, प्राचार्य के बयान से भड़के छात्र संगठन”*

Neta ji
News Add crime sks msp
- Advertisement -

- Advertisement -

*“गोरेलाल मेहता कॉलेज की गरिमा पर सवाल, प्राचार्य के बयान से भड़के छात्र संगठन”*


बनमनखी(पूर्णियां):-गोरेलाल मेहता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रमोद भारतीय हाल ही में कुछ ज्यादा ही “भारतीय” नज़र आ रहे हैं—लेकिन यह भारतीयता कैसी है, इस पर अब बहस छिड़ चुकी है!

 

प्राचार्य महोदय का फेसबुक खोलिए तो वहां मोदी सरकार और मंत्रियों पर तंज ही तंज, कार्टून ही कार्टून मिलेंगे। और दूसरी ओर राहुल गांधी पर गर्व का बयान—“गुरुभाई”! यानी एक हाथ से व्यंग्य के बाण, तो दूसरे हाथ से विपक्ष के लिए प्रशंसा की माला।

अब ज़रा सोचिए, जब महाविद्यालय का मुखिया ही दिन-रात राजनीतिक पोस्ट करने लगे, तो छात्रों से आप कैसी तटस्थता की उम्मीद करेंगे? हालिया घटना ने आग में घी डाल दिया। विद्यार्थी परिषद ने कुलपति को मांगपत्र सौंपा और भारत माता की जय का नारा लगाया। बस! प्राचार्य जी का पारा चढ़ गया और प्रेस विज्ञप्ति में सीधे उन्हें “असामाजिक तत्व” और “उपद्रवी” ठहरा दिया।

News Add crime sks msp
Advo
- Advertisement -

- Advertisement -

News add 2 riya

 

वाह! जो नारे स्वतंत्रता संग्राम के समय हमारी पहचान बने, उन्हें सुनकर आज एक कॉलेज प्राचार्य को असामाजिकता दिखने लगी। और तो और, यही प्राचार्य विपक्षी नेताओं के लिए प्रशंसा के गीत गाने में कोई हिचक नहीं रखते।

अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा का मंदिर राजनीति का अखाड़ा बनेगा? प्राचार्य का काम छात्रों को शिक्षा, शोध और संस्कृति की ओर प्रेरित करना है, न कि अपनी निजी विचारधारा थोपना। यदि देशभक्ति का नारा उपद्रव है, तो फिर समाज किसे राष्ट्रवादी माने?

 

दरअसल, यह पूरा प्रकरण हमें याद दिलाता है कि संवैधानिक पद केवल तनख्वाह और कुर्सी का नाम नहीं है। यह मर्यादा, तटस्थता और ज़िम्मेदारी का नाम है। और जब इन मर्यादाओं की अनदेखी होती है, तो कॉलेज की गरिमा और शिक्षा की आस्था दोनों पर गहरी चोट लगती है।

News Add 3 sks
- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

Sampurn Bharat Banner
SBN self add new reporter
Sampurn Bharat Banner