डिजिटल मीडिया का प्रभाव: सूचना की गति, जिम्मेदारी और लोकतंत्र.
#डिजिटल मीडिया ने क्षेत्र में क्रांति परिवर्तन की सूचना दी है। डेमोक्रेट को अधिक सहभागी और संवादात्मक बनाया गया है। हालाँकि, इसके प्रभाव को सकारात्मक बनाये रखने के लिए जिम्मेदारी, अनुशासन और जागरूकता की आवश्यकता है। जब डिजिटल मीडिया संतुलन और सत्य के साथ काम करता है, तभी यह समाज और लोकतंत्र के लिए मजबूत मीडिया बन सकता है।.....See more
डिजिटल मीडिया ने सूचना के स्वरूप और प्रसार की दिशा को पूरी तरह से बदल दिया है। जहां कभी-कभी खबरों के लिए अखबार या टीवी बैले का इंतजार किया जाता था, वहीं आज कुछ ही खबरों में सूचना मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच जाती है। इस बदलाव ने समाज, राजनीति और लोकतंत्र-तीनों पर गहरा प्रभाव डाला है। डिजिटल मीडिया ने न केवल खबरों की गति बढ़ा दी है, बल्कि आजादी तक पहुंच को और अधिक व्यापक और आसान बना दिया है। हालाँकि, इस तेजी के साथ ज़िम्मेदारियों की ज़रूरतें भी उतनी ही बढ़ गई हैं।
सूचना का लोकतंत्र: डिजिटल मीडिया का सबसे बड़ा प्रभाव सूचना का लोकतंत्र के रूप में देखा जा सकता है। अब सूचना केवल कुछ एसेट तक सीमित नहीं रही। आम नागरिक भी अपनी बात, अनुभव और साझीदार डिजिटल मंचों के माध्यम से सामने रख सकते हैं। इस प्रक्रिया से सत्ता और समाज के बीच की दूरी कम हो जाती है। नागरिक सीधे प्रश्न कर सकते हैं और प्रतिक्रिया दे सकते हैं। इससे संवाद संवाद को नई ऊर्जा मिली है।
स्थानीय पर्यटन को मिला नया मंच: डिजिटल मीडिया ने स्थानीय पर्यटन को भी व्यापक रूप से पहचाना है। गांव या इलाके की समस्या अब केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक समाज तक पहुंच हो सकती है। आश्रम प्रशासन और प्लास्टिक पर प्लास्टिक का दबाव बढ़ाया गया है। स्थानीय पत्रकारिता के लिए डिजिटल मंच एक अवसर बनकर उभरा है, जहां सीमित सामग्री के बावजूद खबरों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।
तेजी के साथ तेजी के साथ: डिजिटल मीडिया की गति जहां एक ओर ताकत है, वहीं दूसरी ओर यही उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है। तेजी से खबरें देने की स्थिति में कमी की जांच और संतुलन कभी-कभी प्रभावित होता है। फ़ॉर्च्यून न्यूज़, अफ़ीम और रेड डिजिटल मीडिया के चैनल चुनौती देने वाले बाज़ार हैं। यह स्थिति समाज में ब्रह्मा और तनाव का भी जन्म हो सकती है।
जिम्मेदार व्यक्तित्व की आवश्यकता : डिजिटल मीडिया के प्रभाव को सकारात्मक बनाए रखने के लिए जिम्मेदार व्यक्तित्व की आवश्यकता है। तथ्यों पर आधारित सारांश, सांकेतिक दृष्टिकोण और नैतिक मानकों का पालन करते हुए डिजिटल मंचों का दृष्टिकोण रखा जा सकता है। यह जिम्मेदारी केवल एविजिट तक सीमित नहीं है, बल्कि एस्टर और दर्शकों की भी है। सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता पर विचार करना भी डिजिटल नागरिकता का हिस्सा है।
राजनीति और डिजिटल मीडिया : डिजिटल मीडिया ने राजनीति को भी नया आयाम दिया है। स्वदेशी और राजनीतिक दल सीधे जनता से संवाद कर सकते हैं। यह संवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक खुली रचनाएँ प्रदान करता है। डिजिटल मंचों का कार्यान्वयन भी संभव है। राजनीतिक प्रचार और संदेश संदेश लोकतांत्रिक विचारधारा को प्रभावित कर सकते हैं। इज़ाज़त और सैद्धांतिक का नोटिफ़िकेशन आवश्यक है।
डिजिटल मीडिया और सामाजिक बदलाव : डिजिटल मीडिया सामाजिक बदलाव में भी अहम भूमिका है। सामाजिक अस्वाभाविक, पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषय डिजिटल माध्यमों से व्यापक चर्चा का हिस्सा बने हैं। इससे सामाजिक वैयक्तिकता का विस्तार होता है और परिवर्तनों की प्रक्रिया तेजी से होती है।
भविष्य की दिशा: भविष्य में डिजिटल मीडिया का प्रभाव और वृद्धि वाला है। टेक्नोलॉजी के विकास के साथ नए मंच और स्वरूप सामने आएंगे। इस स्थिति में यह और भी जरूरी है कि डिजिटल मीडिया जिम्मेदारी और परिचय के साथ आगे बढ़ें। शिक्षा, मीडिया, संगीत और नियम इस दिशा में सहायक हो सकते हैं।
निष्कर्ष : डिजिटल मीडिया ने क्षेत्र में क्रांति परिवर्तन की जानकारी दी है। डेमोक्रेट को अधिक सहभागी और संवादात्मक बनाया गया है। हालाँकि, इसके प्रभाव को सकारात्मक बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी, निर्देश और जागरूकता की आवश्यकता है। जब डिजिटल मीडिया संतुलन और सत्य के साथ काम करता है, तभी यह समाज और लोकतंत्र के लिए मजबूत मीडिया बन सकता है।
लेखक: सुनील कुमार “सम्राट’
स्रोत: संपूर्ण भारत (डिजिटल समाचार मंच)





