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संपादकीय
ग्रामीण भारत की आवाज़: लोकतंत्र की असली पहचान
भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है—यह कथन वर्षों से दोहराया जाता रहा है, लेकिन इसकी वास्तविकता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। देश की बड़ी आबादी…
“विश्व हिंदी दिवस: भाषा का उत्सव, पहचान का आत्मसम्मान”
आज 10 जनवरी—विश्व हिन्दी दिवस।यह मात्र एक कैलेंडर तिथि नहीं, बल्कि उस भाषाई गौरव का स्मरण है, जिसने सदियों से भारतीय जनजीवन की धड़कनों को शब्द…
कफन पर छूट और सिस्टम की चुप्पी-यह दृश्य भारत के विवेक को झकझोरने वाला है…?
(ADVOCATE S.K.SAMRAT)
देश के कई हिस्सों में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन को तो प्रभावित किया ही है, लेकिन इससे अधिक चिंता का विषय वह ख़बर है,…
*अमानत या एग्रीमेंट? यतीमखाना की ज़मीन पर सवालों का रजिस्ट्रेशन!*
पूर्णिया(बिहार):-यतीमखाना की ज़मीन… नाम सुनते ही संवेदना जागती है। लेकिन महाराजगंज–2 एवं जियनगंज पंचायत में यही ज़मीन आज संवेदना नहीं, सौदे की…
*फर्जी प्रमाणपत्रों की परतें और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल.*
बिहार की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। नियोजित शिक्षकों की योग्यता जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह पूरे…
*कुर्सी से ज्यादा सड़क पर—पप्पू यादव की राजनीति का पूरा सफ़र.*
पूर्णिया(बिहार):-कोशी–सीमांचल की राजनीति में कुछ चेहरे चुनावी नतीजों से पहचाने जाते हैं, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जिनकी पहचान भीड़, भरोसे और…
*बनमनखी की राजनीति का मौन रणनीतिकार, मंच पर नेता, पर्दे के पीछे चलता है दिमाग.*
पूर्णिया (बिहार):पूर्णिया जिले की बनमनखी विधानसभा की राजनीति अक्सर एक नाम के इर्द-गिर्द घूमती रही है— कृष्ण कुमार ऋषि। लेकिन इस लगातार जीत की श्रृंखला…
*संपादकीय: डेटा की कीमत, अपराध की तकनीक और सिस्टम की परीक्षा.*
बिहार के पूर्णिया से सामने आया साइबर अपराध का ताज़ा मामला किसी एक व्यक्ति, एक जिले या एक कार्रवाई तक सीमित नहीं है। यह दरअसल उस डिजिटल युग की…
*पुण्यतिथि विशेष : सरदार पटेल — सत्ता नहीं, राज्य संचालन का शाश्वत पाठ.*
इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिन्हें केवल याद नहीं किया जाता, बल्कि जिनसे सीखा जाता है।सरदार वल्लभभाई पटेल उन्हीं में से एक हैं। उनकी…

