*फुटपाथ से राष्ट्रीय मंच तक: सुहानी की उड़ान, पिता का संघर्ष और मां का संबल.*
#कहते हैं-हौसले बुलंद हों तो हालात आड़े नहीं आते। बनमनखी की बेटी सुहानी ने इस कथन को सच कर दिखाया है। गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय थांग-टा प्रतियोगिता में तृतीय स्थान हासिल कर सुहानी ने न सिर्फ अपने कॉलेज, बल्कि पूरे बनमनखी क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
बनमनखी (पूर्णिया):-कहते हैं-हौसले बुलंद हों तो हालात आड़े नहीं आते। बनमनखी की बेटी सुहानी ने इस कथन को सच कर दिखाया है। गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय थांग-टा प्रतियोगिता में तृतीय स्थान हासिल कर सुहानी ने न सिर्फ अपने कॉलेज, बल्कि पूरे बनमनखी क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
शिक्षानगर वार्ड संख्या–11, बनमनखी निवासी सुहानी, गोरेलाल मेहता कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष (अंग्रेज़ी) की छात्रा है। वह एनसीसी की अग्रणी कैडेट भी है और कॉलेज की शैक्षणिक व सह-शैक्षणिक गतिविधियों में निरंतर अग्रणी रही है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रमोद भारतीय के अनुसार, सुहानी शिक्षकों की “आंखों की तारा” रही है और उसने राष्ट्रीय मंच पर अपने अनुशासन व परिश्रम का प्रमाण दिया है।
पिता का कर्तव्य, संघर्ष की मिसाल: सुहानी के पिता गोपाल कुमार दास फुटपाथ पर जड़ी-बूटी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बच्चों की शिक्षा और खेल से कभी समझौता नहीं किया। गोपाल दास कहते हैं, “गरीबी के कारण मैं खुद नहीं पढ़ सका—इसका मलाल है। लेकिन अपने दो पुत्र और दो पुत्रियों को अच्छी तालीम देना मेरा सपना है।”
मां का सहयोग, शिक्षा की प्रेरणा:-सुहानी की मां सुनीता कुमारी स्वयं अभी पीजी की छात्रा हैं। पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण बच्चों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। मां-बेटी का यह साझा संकल्प परिवार की सबसे बड़ी ताकत है।
चार भाई-बहन, एक लक्ष्य:-सुहानी दो भाई और दो बहनों में दूसरे नंबर पर है। उनका बड़ा भाई बीए फाइनल ईयर का छात्र है और एक अच्छा क्रिकेट खिलाड़ी भी है। परिवार शिक्षा और खेल—दोनों में आगे बढ़ने के लिए एकजुट है।
शुभकामनाओं का सिलसिला:-सुहानी की इस उपलब्धि पर सभापति संजना देवी, वार्ड संख्या–11 की पार्षद सरस्वती देवी के साथ-साथ समाजसेवी अनिल मेहरा, शिक्षक नवीन यादव, सेवानिवृत्त शिक्षक कैलाश सिंह,शिक्षक राजन सिंह, रामजतन यादव तथा अधिवक्ता एस.के. सम्राट सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आज सुहानी की जीत सिर्फ एक पदक नहीं—यह पिता के कर्तव्यबोध, मां के सहयोग, और परिवार की एकजुट मेहनत की जीत है। फुटपाथ पर जड़ी-बूटी बेचने वाले पिता की बेटी का राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना यह संदेश देता है कि संघर्ष कभी प्रतिभा को रोक नहीं सकता।






