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*नितिन नबीन: अचानक नहीं, सुनियोजित उभार की कहानी.*

#भारतीय राजनीति में कुछ फैसले ऐसे होते हैं, जो पहली नज़र में चौंकाते हैं, लेकिन जब उनके भीतर झांका जाए तो वे वर्षों की तैयारी, संगठनात्मक धैर्य और नेतृत्व की सूक्ष्म समझ का परिणाम दिखाई देते हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का निर्णय भी ऐसा ही है। यह केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि भाजपा की उस राजनीतिक सोच का प्रतिबिंब है, जहां शोर नहीं, काम बोलता है।

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भारतीय राजनीति में कुछ फैसले ऐसे होते हैं, जो पहली नज़र में चौंकाते हैं, लेकिन जब उनके भीतर झांका जाए तो वे वर्षों की तैयारी, संगठनात्मक धैर्य और नेतृत्व की सूक्ष्म समझ का परिणाम दिखाई देते हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का निर्णय भी ऐसा ही है। यह केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि भाजपा की उस राजनीतिक सोच का प्रतिबिंब है, जहां शोर नहीं, काम बोलता है।

 

जिस नाम की चर्चा नहीं थी, उसी पर लगी मुहर: जब भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष या शीर्ष संगठनात्मक पदों को लेकर अटकलें चल रही थीं, तब जिन नामों की चर्चा थी, उनमें नितिन नबीन शामिल नहीं थे। यहां तक कि बिहार भाजपा के भीतर भी उन्हें शीर्ष दावेदारों की श्रेणी में नहीं रखा जा रहा था। ऐसे में अचानक उनका नाम सामने आना, राजनीतिक गलियारों के लिए किसी झटके से कम नहीं था। यह वही क्षण था, जिसने यह साबित कर दिया कि भाजपा में दिखाई देना जरूरी नहीं, उपयोगी होना जरूरी है।

 

विरोध की राजनीति में भी शालीनता: दुर्लभ गुण: नितिन नबीन की राजनीति की सबसे विशिष्ट पहचान है — सम्मानजनक व्यवहार। राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी द्वारा उन्हें सार्वजनिक रूप से दी गई शुभकामनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि नितिन नबीन ने राजनीति को कभी व्यक्तिगत कटुता का मैदान नहीं बनने दिया। आज के दौर में, जब राजनीतिक संवाद आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमलों से भरा होता है, वहां वैचारिक विरोधी से भी सम्मान अर्जित कर लेना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं।

 

पिता की विरासत, लेकिन अपनी पहचान: नितिन नबीन की राजनीति को समझने के लिए उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा को समझना जरूरी है। वे भाजपा के उन नेताओं में थे, जो संगठन में मजबूत थे, लेकिन सत्ता की राजनीति में आगे नहीं बढ़ पाए। उनकी असमय मृत्यु के बाद बेहद कम उम्र में नितिन नबीन पर राजनीति की जिम्मेदारी आ गई। लेकिन यह कहना कि वे केवल विरासत के सहारे आगे बढ़े, तथ्यों के साथ अन्याय होगा।
पांच बार लगातार विधायक चुना जाना, बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच टिके रहना और संगठन में भरोसेमंद बने रहना — यह सब व्यक्तिगत क्षमता का प्रमाण है।

 

संगठन की पाठशाला से निकला नेतृत्व: नितिन नबीन की राजनीति का मूल आधार संगठन है, मंच नहीं।भाजपा युवा मोर्चा से लेकर राष्ट्रीय संगठन तक, उन्होंने ऐसे पदों पर काम किया जहां निर्णय लेने होते हैं, तालियां बटोरने नहीं।

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  1. युवाओं के बीच संगठन विस्तार
  2. सीमावर्ती और छोटे राज्यों में पार्टी को मजबूत करना
  3. चुनावी रणनीति और ज़मीनी समन्वय

विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में उनका कार्यकाल भाजपा के भीतर “मॉडल प्रभारी” के रूप में देखा जाता है। वहां उन्होंने न सिर्फ चुनाव जितवाए, बल्कि स्थानीय नेताओं का भरोसा भी जीता।

 

अहंकार से दूर, कार्यकर्ताओं के करीब: नितिन नबीन की कार्यशैली की एक बड़ी विशेषता यह है कि वे कार्यकर्ता की भाषा समझते हैं। वे मंच से नहीं, संगठन के भीतर से नेतृत्व करते हैं। उनमें वह राजनीतिक अहंकार नहीं दिखता, जो अक्सर लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद नेताओं में आ जाता है। यही कारण है कि संगठन के भीतर उन्हें “सुनने वाला नेता” माना जाता है।

 

अमित शाह का भरोसा: आसान नहीं, सस्ता भी नहीं: यह बात छिपी नहीं है कि नितिन नबीन को केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा प्राप्त है। लेकिन भाजपा में भरोसा किसी रिश्ते या समीकरण से नहीं, बल्कि परिणाम से मिलता है।नितिन नबीन को बार-बार कठिन राज्यों और जटिल संगठनात्मक जिम्मेदारियों में भेजा जाना इस बात का संकेत है कि पार्टी उन्हें समस्या सुलझाने वाला नेता मानती है।

 

‘कार्यकारी अध्यक्ष’: अवसर भी, चेतावनी भी: उनके पद के साथ जुड़ा ‘कार्यकारी’ शब्द यह बताता है कि पार्टी उन्हें खुला मैदान दे रही है, लेकिन बिना निगरानी के नहीं।
यह पद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की बारीकियों को समझने, विभिन्न राज्यों के संगठन को साधने और नेतृत्व क्षमता साबित करने का अवसर देता है।यह एक तरह से राष्ट्रीय राजनीति की अग्निपरीक्षा है।

 

भाजपा का संदेश: राजनीति में शॉर्टकट नहीं: इस नियुक्ति के जरिए भाजपा ने एक स्पष्ट संदेश दिया है-जो चुपचाप संगठन गढ़ता है, वही लंबे समय तक नेतृत्व करता है। नितिन नबीन का उभार बताता है कि भाजपा अब भी कैडर आधारित पार्टी है, जहां धैर्य, अनुशासन और व्यवहार को महत्व दिया जाता है।

 

निष्कर्ष: फर्श से अर्श तक, लेकिन बिना शोर: नितिन नबीन की यह यात्रा अचानक नहीं है, बल्कि वर्षों की सुनियोजित चुप्पी, संगठनात्मक श्रम और संतुलित राजनीति का परिणाम है।वे राष्ट्रीय राजनीति में कोई तूफान बनकर नहीं आए हैं, बल्कि एक स्थिर, भरोसेमंद और सधे हुए नेता के रूप में उभरे हैं।आने वाला समय तय करेगा कि वे इस जिम्मेदारी को कितनी ऊंचाई तक ले जाते हैं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि भाजपा ने एक ऐसा चेहरा चुना है, जो कम बोलता है, ज्यादा संभालता है।

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