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*”दरभंगा में ऑनर किलिंग: बेटी के सामने दामाद की गोली मारकर हत्या, सोशल मीडिया पर बंटा समाज”*

*अंतरजातीय विवाह से नाराज पिता ने सरकारी अस्पताल में बीएससी नर्सिंग छात्र को मारी गोली; आरोपी पर हत्या का केस, समाज में ‘सम्मान बनाम प्रेम’ पर बहस तेज.*

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“दरभंगा में ऑनर किलिंग: बेटी के सामने दामाद की गोली मारकर हत्या, सोशल मीडिया पर बंटा समाज”

✍️सुनील कु. सम्राट✍️

अंतरजातीय विवाह से नाराज पिता ने सरकारी अस्पताल में बीएससी नर्सिंग छात्र को मारी गोली; आरोपी पर हत्या का केस, समाज में ‘सम्मान बनाम प्रेम’ पर बहस तेज.

 

सम्पूर्ण भारत, दरभंगा (बिहार) :— जिले में ऑनर किलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) में बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष के छात्र राहुल कुमार (25) की सोमवार शाम उसके ससुर प्रेमशंकर झा ने कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। घटना उस समय हुई जब राहुल की नवविवाहित पत्नी तन्नू प्रिया (नर्सिंग प्रथम वर्ष) पास ही मौजूद थीं।

 

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तन्नू प्रिया के मुताबिक, “मेरे पिता ने हुडी पहनकर मेरे पति के पास आकर सीने में गोली मार दी। वह मेरी गोद में गिर पड़े।” तन्नू का आरोप है कि उसका पूरा परिवार इस साजिश में शामिल था। शादी के बाद भी उसने अदालत को खतरे की जानकारी दी थी।

 

राहुल और तन्नू की शादी चार महीने पहले हुई थी, लेकिन परिवार इस अंतरजातीय विवाह से नाराज था। गोलीकांड के बाद हॉस्टल के छात्रों ने आरोपी की पिटाई कर दी, जिसे गंभीर हालत में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया।

 

घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक वर्ग आरोपी पिता के लिए कड़ी सज़ा की मांग कर रहा है, जबकि कुछ लोग उसके समर्थन में भी उतर आए हैं। दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार और एसएसपी जगन्नाथ रेड्डी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

विश्लेषण:-
दरभंगा की यह वारदात न केवल एक पारिवारिक विवाद या हत्या का मामला है, बल्कि समाज में ‘ऑनर किलिंग’ और अंतरजातीय विवाह पर चली आ रही मानसिकता का कड़वा सच भी सामने लाती है। सोशल मीडिया पर जहां युवा वर्ग इसे प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला मान रहा है, वहीं एक वर्ग इसे ‘परिवार की मर्यादा’ से जोड़कर आरोपी का बचाव कर रहा है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समाज को भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय न्यायपालिका पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि संविधान हर वयस्क को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या प्रेम करने की सजा मौत हो सकती है, और क्या ‘सम्मान’ के नाम पर कानून को हाथ में लेने का कोई औचित्य है?

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