“विश्व हिंदी दिवस: भाषा का उत्सव, पहचान का आत्मसम्मान”

हिन्दी किसी क्षेत्र की नहीं, भारत की भाषा है। यह हमारी मिट्टी की खुशबू है,  हमारी संस्कृति की धारा है और हमारी पहचान का आधार। विश्व हिन्दी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि—भाषा का सम्मान करना, अपने अस्तित्व का सम्मान करना है। और एक राष्ट्र के रूप में हमें अपनी भाषा के प्रति सम्मान, संवेदना और ज़िम्मेदारी तीनों निभाने होंगे।.........:संपादकीय

आज 10 जनवरी—विश्व हिन्दी दिवस।यह मात्र एक कैलेंडर तिथि नहीं, बल्कि उस भाषाई गौरव का स्मरण है, जिसने सदियों से भारतीय जनजीवन की धड़कनों को शब्द दिए, संस्कृति को स्वर दिया और राष्ट्रीय चेतना को आकार दिया।

 

हिन्दी वह भाषा है, जो सिर्फ बोली नहीं जाती—जी जाती है।किसान से लेकर कवि तक, चौपाल से लेकर संसद तक और लोकगीतों से लेकर सोशल मीडिया तक—हिन्दी जीवन के हर पहलू में प्रवाहित है।

 

हिन्दी: विश्व की आवाज़- आज हिन्दी सिर्फ भारत की सीमाओं में बंधी भाषा नहीं है।विश्व के 170 से अधिक देशों में हिन्दी बोलने वाले लोग मौजूद हैं।अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिन्दी की स्वीकृति बढ़ रही है—प्रवासी भारतीयों की नई पीढ़ी भी इसे पहचान और सांस्कृतिक जुड़ाव के रूप में देख रही है।

 

संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने की कोशिशें जारी हैं—यह केवल भाषाई प्रयास नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

 

हिन्दी की चुनौती: बोलते हैं, पर लिखते नहीं- हिन्दी की लोकप्रियता जितनी व्यापक है, उसकी चुनौतियाँ भी उतनी ही गहरी हैं।सबसे बड़ा संकट यह कि—हम हिन्दी बोलते तो हैं, पर लिखने-पढ़ने में लगातार अंग्रेज़ी पर निर्भर होते जा रहे हैं।

  1. स्कूलों में अंग्रेज़ी माध्यम का वर्चस्व
  2. कार्यालयों में अंग्रेज़ी की अनिवार्यता
  3. उच्च शिक्षा में हिन्दी संसाधनों की कमी
  4. और युवाओं में “प्रभाव” के नाम पर भाषा से दूरी

 ये सब हिन्दी के सामने खड़ी गंभीर चुनौतियाँ हैं।हिन्दी तभी मजबूत होगी जब इसे बोलने के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और व्यवसाय की भाषा भी बनाया जाएगा।

 

भाषा का मतलब सिर्फ़ शब्द नहीं—पहचान भी है: भाषा किसी समाज की आत्मा होती है। हिन्दी ने: हमारे इतिहास को शब्द दिए, स्वतंत्रता आंदोलन को स्वर दिया,साहित्य को वैभव दिया, और आम जनमानस को एक साझा धागे में पिरोया। आज ज़रूरत है कि हम हिन्दी को “दूसरी भाषा” नहीं, अपनी पहली सांस्कृतिक ज़िम्मेदारी मानें।

 

विश्व हिंदी दिवस का संदेश: विश्व हिन्दी दिवस का उद्देश्य केवल भाषण, समारोह और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं होना चाहिए।यह दिन हमें याद दिलाता है कि:

  1. हिन्दी को तकनीक के साथ जोड़ने की आवश्यकता है,
  2. हिन्दी में शोध और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना होगा,
  3. बच्चों को मातृभाषा में सीखने का अवसर मिलना चाहिए,
  4. और प्रशासनिक ढांचे में भी हिन्दी का प्रयोग बढ़े।

भाषा तभी जीवंत रहती है जब वह समाज, शिक्षा, तकनीक और प्रशासन—चारों में समान रूप से प्रवाहित हो।

 

✍️ अंत में…हिन्दी किसी क्षेत्र की नहीं, भारत की भाषा है। यह हमारी मिट्टी की खुशबू है,  हमारी संस्कृति की धारा है और हमारी पहचान का आधार। विश्व हिन्दी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि—भाषा का सम्मान करना, अपने अस्तित्व का सम्मान करना है। और एक राष्ट्र के रूप में हमें अपनी भाषा के प्रति सम्मान, संवेदना और ज़िम्मेदारी तीनों निभाने होंगे।

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